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बागवान पौधों की कोहरे व पाले से करें बचाव : डा. विनोद शर्मा

Byjanadmin

Dec 26, 2018


जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
उप निदेशक उद्यान विभाग डा. विनोद शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि हर वर्ष कोहरे तथा पाले से आम, लीची, पपीता, केला व अमरूद इत्यादि फल पौधे ज्यादा प्रभावित होते है, जिससे बागवानों को आर्थिक तौर पर काफी नुकसान उठाना पडता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष काफी लम्बे समय से मौसम शुष्क रहने के कारण फल पौधों पर कोहरे का कुप्रभाव ज्यादा होने की सम्भावना बनी है। फल पौधे कोहरे के प्रभाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। उन्होंने बताया कि कोहरे का प्रभाव नए पौधौं पर अधिक पडता है। उन्होंने बागवाानों को सलाह देते हुए कहा कि फल पौधों को पाले से बचाने के लिए छोटी आयु (4-5 वर्ष के कम) के आम के पौधों को कोहरे से बचाने के लिये सर्दियों में घास, सरकण्डे या टाट के छत्ते बनाने चाहिए। उन्होंने बताया कि यह छत्ते इस प्रकार बनायंे जायें कि उत्तर-पश्चिम से पौधा ढक जाये, परन्तु दक्षिण-पूर्व दिशा में खुला रहे ताकि पौधे को धूप और हवा प्रयाप्त मिलती रहे तथा बडे पौधों में जब कोहरे की आंशका हो या मौसम के बारे में पूर्व अनुमान बताया गया हो तब बगीचे मे पत्तियां, खरपतवार इत्यादि जलाकर धुआं करना चाहिये। इससे भी काफी हद तक कोहरे के प्रभाव से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि जिन बगीचों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो उनमें सर्दियो में शाम के समय हल्की सिंचाई नियमित रूप से करनी चाहिये।
उन्होंने कोहरे से प्रभावित पौधों की देख-रेख के उपाय बताते हुए कहा कि आम के जो फल पौधे कोहरे से अत्यधिक प्रभावित हुए है, उनकी कांट-छंाट फरवरी माह के अन्तिम सप्ताह में करें। कोहरे से प्रभावित सभी टहनियों को काट दें तथा पौधे के कटे हुए भाग पर चैवाटिया पेस्ट (काॅपर कार्बोनेट एक भाग, लैड आक्साईड तथा अलसी का तेल सवा भाग) अथवा र्बोडो पेन्ट (काॅपर सल्फेट यानि नीला थोथा तथा अनबूझा चूना एक-एक भाग तथा तीन भाग अलसी का तेल) का लेप लगायंे। उन्होंने बताया कि पौधांे पर कांट-छांट के उपरान्त काॅपर आक्सीक्लोराईड को तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव करें तथा अप्रैल के अन्तिम सप्ताह में पौधांे पर एक प्रतिशत यूरिया का छिडकाव करें, ताकि इन फल पौधों की टहनियों व अन्य भागों के घाव भरने के अतिरिक्त बढौतरी भी हो।
उन्होंने अधिक जानकारी के लिये अपने निकट के उद्यान प्रसार अधिकारी, उद्यान विकास अधिकारी, विषय विशेषज्ञ, उप निदेशक उद्यान अथवा बागवानी विश्व विद्यालय के वैज्ञानिकों से सम्र्पक करें।

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