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हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार को अपने कर्मचारियों पर कतई भरोसा नहीं

Byjanadmin

Jan 5, 2019

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को निजी कंपनियों को ठेके पर देने की तैयारी

जनवक्ता डेस्क बिलासपुर
ऐसा लगता है हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार को अपने कर्मचारियों पर कतई भरोसा नहीं जो सरकारी कर्मचारियों का काम अब ठेके पर देने की कवायद शुरू कर दी है।जी हां, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को सरकार का फेस माना जाता है। विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सरकार को रीढ़। जो सरकार के हर काम का प्रचार प्रसार रात दिन एक कर करते हैं लेकिन मुख्यमंन्त्री जयराम ठाकुर को डीआईपीआर का काम पसंद नहीं आ रहा है। यही वजह है कि अब डिपार्टमेंट के काम आउटसोर्स करने यानी निजी कंपनियों को ठेके पर देने की तैयारी चल रही है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंन्त्री का सबसे अहम कार्य यानी उनका भाषण जो वह जनता के बीच रैलियों, जनसभाओं और विभिन्न कार्यक्रमों में देते हैं वह अब सरकारी कर्मचारी नहीं बल्कि कंपनी का कर्मचारी लिखकर देगा। इस भाषण में जनता के सम्मुख सरकार का आईना पेश किया जाता है। सरकार क्या कर रही है, क्या करने जा रही है और भविष्य में सरकार की क्या रणनीति रहेगी, यह सब जानकारी सरकारी अधिकारी कर्मचारियों के बजाय कंपनी के कर्मचारी सीएम जयराम ठाकुर को देंगे। सूत्र बताते हैं कि इस कार्य को ठेके पर देने का कार्य अंतिम चरण में है। लेकिन इससे डीआईपीआर के अधिकारी कर्मचारी खासे नाराज हो गए हैं। दशकों से जो कार्य, उप निदेशक, जिला लोकसंपर्क अधिकारी, उप जिला लोक संपर्क अधिकारी कर रहे थे, वही कार्य अब एक कंपनी का कर्मचारी करेगा तो उन्हें कैसे ठीक लगेगा। क्योंकि अब इन अधिकारियों को सूचना मुख्यमंत्री के बजाय निजी कम्पनी के कर्मचारी को देनी होगी, जो दशकों से काम कर रहे अधिकारी कर्मचारियों का बॉस बनकर बैठेगा। सरकार के भीतर की जानकारी कम्पनी को होगी, तो क्या सीक्रेसी लीक होने की संभावना नहीं रहेगी। इसी चिंता में विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की नाराजगी मोल लेनी पड़ेगी वो अलग। इस बारे में जब सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों से बात करने के प्रयास किये तो इस पर कोई कुछ भी कहने को तैयार न था। क्योंकि कोई बोला तो समझो सरकार के निशाने पर आना। यूँ भी जब से प्रदेश में सरकार बनी एक साल पूरा हो लेकिन अभी तक किसी डीपीआरओ, एपीआरओ का तबादला भी नहीं हुआ। सूत्र बताते हैं कि पीआर को पंगु कर दिया गया है। उनकी बैठकें तक नहीं ली जाती और आला अधिकारियों द्वारा उन पर कई तरह के दबाव बनाए जा रहे हैं जिससे विभाग में नाराजगी व्याप्त है।
उधर, इससे प्रदेश के खजाने पर भी अनावश्यक आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। पहले ही 50 हजार करोड़ के कर्ज तले दबे हिमाचल में सरकारी कार्य भी यदि ठेके पर होगा तो इसका विरोध होना भी लाजिमी है। अब यदि मुख्यमंन्त्री का भाषण ही ठेके पर बनेगा तो भविष्य में और भी कई कार्य ठेके पर दिए जा सकते हैं। जिसकी जानकारी समय समय पर जनता तक पहुंच जाएगी।

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