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कलात्मक ढंग से दिया उर्जा संरक्षण का प्रभावी संदेश

Byjanadmin

Feb 12, 2019

कार्यशाला में छात्रों को करवाया उर्जा के वर्तमान परिदृष्य से परिचित

नाटक समझो और समझाओं, कीमती उर्जा बचाओ और जंगल बोल रहा का हुआ मंचन

जनवक्ता डेस्क, बिलासपुर
हिमाचल में कला प्रतिभाओं की कमी नहीं, आवश्यकता है उन्हें उचित मार्गदर्शन देकर तराशा जाए और प्लेटफार्म उपलब्ध करवाया जाए ताकि यह प्रतिभावान बच्चे राष्ट्रीय स्तर पर न केवल ख्याति ही अर्जित करें अपितु प्रदेश का नाम भी रोशन करें। यह उद्गार फिल्म निर्माता एंव सचिव सामाजिक सेवा कला समुह दिल्ली अनिल के. राजदान ने प्रदेश के युवा एवं छात्रों के लिए जवाहर नवोदय विद्यालय कोठीपुरा में ब्यूरो ऑफ एनर्जी, निदेशालय उर्जा हिमाचल प्रदेश एवं सामाजिक सेवा कला समूह न्यू दिल्ली के सहयोग से आयोजित पंद्रह दिवसीय अभिनव कार्यशाला के समापन समारोह के अवसर पर व्यक्त किए। उन्होने कहा कि कार्यशाला को आयोजित करने का मुख्य उद्ेश्य युवा पीढी में विभिन्न कला माध्यमों एंव गतिविधियों से उर्जा संरक्षण के महत्व से परिचित करवाया जाए। उन्होंने बताया कि सामाजिक सेवा कला समुह दिल्ली द्वारा विगत 18 वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में स्कूली बच्चों एंव युवाओं के साथ सामाजिक एंव सांस्कृतिक महत्व और जागरूकता संचार कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है।
अनिल के. राजदान ने बताया कि कार्यशाला के दौरान प्रतिभागी छात्रों को देश की उर्जा के वर्तमान परिदृष्य से परिचित करवाते हुए उन्हें उर्जा की मांग एंव आपूर्ति व उर्जा संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया ताकि भविष्य में वह एक जिम्मेदार नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में अपना सहयोग दें।
इस अवसर पर जवाहर नवोदय विद्यालय कोठीपुरा के प्राधानाचार्य एस के भट्ट ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय के 40 से भी अधिक बच्चों ने इस कार्यशाला में हिस्सा लिया और नाट्य तत्वों, स्वतः स्फूर्त खेलकूद, दृष्यकला, संगीत व चित्रकला, क्लाज के अतिरिक्त रंगमंच की आधुनिक तकनीक के बारे में विस्तृत ज्ञान प्राप्त किया।
इस कार्यशाला में छात्र प्रतिभागियों को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली के स्नातक एंव प्रतिष्ठित रंगकर्मी, निर्देशक व फिल्म निर्माता गुलशन वालिया, संगीतज्ञ अनुप सिंह मस्ताना, एमएस. युनिवर्सीटी बडोदा के दृष्य कला स्नातक जसलीन सिंह व जिला मण्डी के नाट्य कर्मी वेदकुमार ने विभिन्न कला विधाओं का प्रशिक्षण दिया।
पन्द्रह दिवसीय कार्यशाला मंे छात्र प्रतिभागियों द्वारा उकेरे चित्रों की प्रदर्शनी भी समारोह स्थल पर प्रदर्शित की गई जबकि नाटक समझो और समझाओं, कीमती उर्जा बचाओ और जंगल बोल रहा हैं का भी सुन्दर व प्रभावी मंचन किया गया। नाटक समझो और समझाओं, कीमती उर्जा बचाओ में नन्हे कलाकारों ने अत्यन्त प्रभावी ढंग से उर्जा बचाने का सन्देश सम्प्रेषित किया जबकि दूसरे नाटक जंगल बोल रहा में कलाकारों ने जंगली जानवरों के मुखौटे पहनकर प्लास्टिक प्रयोग से हो रहे पर्यावरण के नुक्सान और जंगली जानवरों पर पडते प्रतिकूल प्रभाव का सुन्दर भाव भंगिमाओं से प्रस्तुतिकरण किया।
इस अवसर पर एसके. भट्ट ने प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया।

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