देहरादून,। मंथन संपूर्ण विकास केंद्र (एसवीके)-दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के सामाजिक प्रकल्प ने दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में शिक्षक दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया। यह कार्यक्रम भारतवर्ष में मंथनदृएसवीके आंदोलन की आधारशिला बने शिक्षकों के अडिग समर्पण और परिवर्तनकारी योगदान को समर्पित था। इस आयोजन में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, असम, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से आए मंथनदृएसवीके विद्यालयों के लगभग 100 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। दिव्य गुरु आशुतोष महाराज की दिव्य दृष्टि से प्रेरित इन शिक्षकों ने वंचित बच्चों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के माध्यम से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम का शुभारंभ दिव्य गुरु श्री आशुतोष महाराज जी की आरती से हुआ, जिससे सम्पूर्ण वातावरण में श्रद्धा और शांति का संचार हुआ। इसके पश्चात मंथनदृएसवीके के पूर्व छात्रों द्वारा एक श्रद्धा-सुमन अर्पित की गई, जिसमें उन्होंने महाराज को परम शिक्षक और शाश्वत मार्गदर्शक के रूप में नमन किया। यह भेट उनके जीवन में पूज्य गुरुदेव की दूरदर्शी शिक्षा के गहरे प्रभाव को दर्शाती हैं।
अनुभवात्मक शिक्षण गतिविधियों में मेज “भूलभुलैया गतिविधि” विशेष रूप से प्रभावशाली रही, जिसमें जीवन की वास्तविक चुनौतियों को रूपक के रूप में प्रस्तुत किया गया और यह दर्शाया गया कि किस प्रकार शिक्षक बच्चों को धैर्य, विवेक और सहानुभूति के साथ मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। इसके पश्चात “जेल गतिविधि” आयोजित की गई, जिसमें छात्रों को अज्ञानता और अशिक्षा की जेल में बंद दर्शाया। इसका मुख्य संदेश था कि केवल चार प्रतीकात्मक चाबियों कृ शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक उत्थान के माध्यम से ही एक छात्र अज्ञानता और अशिक्षा की कैद से बाहर आ सकता है। इस गतिविधि ने बच्चों की क्षमता को खोलने में शिक्षकों की निर्णायक भूमिका को सशक्त रूप में प्रस्तुत किया।
इसके पश्चात मंथनदृएसवीके के छात्र-छात्राओं ने मंच पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं, जिनमें एक हृदयस्पर्शी गुरु वंदना और विविध सांस्कृतिक नृत्य शामिल थे। इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने न केवल शिक्षकों के प्रति गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता को अभिव्यक्त किया, बल्कि मंथनदृएसवीके द्वारा विद्यार्थियों में रोपित मूल्यों की सजीव झलक भी प्रस्तुत की। इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी पैनल चर्चा कृ “मंथन की बात दृ शिक्षकों के साथ”, जो एक गंभीर, संवादात्मक सत्र रहा। इस मंच के माध्यम से शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा किए, शिक्षण संबंधी अंतर्दृष्टियाँ प्रस्तुत कीं और मंथनदृएसवीके में मूल्यनिष्ठ शिक्षा के भविष्य को लेकर सार्थक विमर्श किया।